Wednesday, November 22, 2023

छठ या छठों की फौज?

ये किसी की भावनाओं को भड़काने के लिए नहीं है।  

पहले भी कई बार लिखा, मेरे लेखों को भावनात्मक भड़क के साथ ना पढ़कर, थोड़ा ठन्डे दिमाग से पढ़ें और उस पर विचार करें की किसी भी धर्म का या रीती-रिवाज का राजनीतिक विज्ञान से क्या रिस्ता है? 

और उसका क्या रिस्ता जुर्म से हो सकता है?  

छठ से क्या समझते हैं आप?

छठ मतलब, छठा हुआ?  

हिन्दी में 6?

अंग्रेजी में S-ix या Si -x ?

एक और तरह की अंग्रेजी भी है 

खास अंग्रेजों की दी हुई 

कमेंट्री -- 

और ये लगा छक्का?

अर्रे चौके का क्या होगा फिर?

दुक्के वाला छक्का?

तीके वाला छक्का?

या चौके वाला छक्का?


चलो एक और छठ को जानते हैं --

बिहारियों की छठ?

ये क्या होती है भई?

और कैसे होती है?

मालुम है कुछ?

बिहार में क्या खास है, इसके बारे में?

नदियों को गन्दा करते हैं, 

अपने बिहारी भाई लोग इस दिन?

या साफ करते हैं?

या तमाशा होता है पूरा 

इस दिन, इन भाई लोगों का?

इसका क्या मतलब हो सकता है -- अपनी छठ (6) रूठ गई, सत्ते (7) को बिगाड़ो?

इसका चाची 420 की कहावत से भी कोई लेना देना हो सकता है क्या? इन चाची-420 वालां की खास तारीख पता करो। क्यूँकि हज़म मुझे भी नहीं हो रहा की जुए वाले लोगों की ज़िंदगियों की बोलियाँ कैसे लगाते हैं ? इसकी भी 6th, उसकी भी 6th, उसकी भी और उसकी भी 6th ? ऐसा क्या खास है, इस छठ में? 

 मतलब अपना ना सुधार के, दूसरे का बिगाड़ो?  कंस विज्ञान है ये? या रावण ज्ञान है ये? पर कितना अजीब है ना? ऐसे ही भिड़ाती हैं, ये राजनीतिक पार्टियाँ और इनका राजनीतिक विज्ञान। 

किस-किस का ब्याह कौन-कौन सी छठ न हो रहा सै बालको? बड़े भी बता सकते हैं। शिव के 16 पे बिगाड़ कहाँ है? उसने सुना 26 पैदा कर दी? सात से उसकी क्या लड़ाई? 07 से? 1 पे 0, 2 पे 7 ? अब ये 6 वाले, मुझे आँख दिखाने की कोशिश ना करें। आते हैं, इन छठों के बिगाड़ पे भी।   

नोट: बिहारी ही नहीं, इधर-उधर हिन्दू धर्म के ठेकेदार कहीं नजर दौड़ा लें, आम है ये हिन्दू रिवाजों में खासकर           नदी तालाबों, झीलों, जमीनों को गन्दा करना। वो भी धर्म-कर्म के नाम पे?  

        यहाँ छठ की बात थी, तो थोड़ी रौशनी बिहार पे पड़ गई। 

बाकी 4, 5, 6, 7 सब पे स्टेज तैयार रहती है, बढ़िया वाली? यहाँ लोगों को जुए के जालों से मुक्ती चाहिए। मगर सिस्टम है की लगा पड़ा है, चो दम चु करने ? भाषा गलत तो नहीं? वही तो, सोचो ये काँड क्या हैं और खिलवाड़ क्या हैं, लोगों की ज़िंदगियों के साथ ? जिधर देखो, उधर छठों के साए? या सताए?         

लगता है इंटरनेट को कोई तकलीफ हो रही है। इसलिए गड़बड़ कर रहा है। आते हैं इन नंबरों पे भी, आगे किसी पोस्ट में। 

No comments:

Post a Comment