Posts

Showing posts from July, 2024

राजनीतिक रंगमंच और नशा-शिकार, मानव-रोबोट्स

आपकी हमारी जिंदगी का हर-पल, हर उतार-चढाव राजनीति और इस वयवस्था के इर्द गिर्द घुमता है और ज्यादातर हमारी जानकारी के बैगर।    जिंदगी के बहुत से अहम् फैसले ऐसा लगता है की हम खुद करते हैं। मगर ज्यादातर को जिस दिन समझ आने लगा की हकीकत इसके विपरित है तो हैरानी किसे नहीं होगी? खासकर, आम-आदमी के केस में। गाँव में आने के बाद, ये सब जैसे मैं हर रोज होते देख रही हूँ। अनुभव कर रही हूँ। इधर, उधर, उधर, जिधर देखो हर उस तरफ। कैसे संभव है ये? और मैंने इन लोगों को मानव-रोबोट्स का नाम देना शुरू कर दिया। ऐसा लग रहा था, जैसे इंसान जैसा कोई दिमाग है ही नहीं, इन लोगों के पास। जैसे कोई कंप्यूटर या रोबोट काम करता है, उसमें भरी हुयी प्रोग्रामिंग के अनुसार, कुछ-कुछ, वैसे ही सब यहाँ होता नजर आ रहा था।    मेरे लिए भी अजीब नहीं बल्की बहुत अजीब था ये सब देखना, अनुभव करना, जानना। धीरे-धीरे जब जानकार लोगों ने गुप्त-गुफाओं की तरफ इशारे करने शुरू किये तो जैसे अचानक से काफी कुछ समझ आने लगा। जैसे कंप्यूटर की सैटिंग कर दें की उसे कितनी देर बार अपने आप स्क्रीन ऑफ कर देना है या कब कितने मिन्ट्स के बाद...

Morality and Illigal Experimentations in Living Labs (Society)?

 Living Labs? ये क्या होती हैं? जहाँ कहीं जीवित प्राणियों पे, उस वक़्त चल रही किर्याओं या पर्किर्याओं पर अध्ययन होता है, उसे जीवित लैब बोलते हैं। जानवरों, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों तक पर, परिक्षण करने के कुछ रुल होते हैं। मगर, आज की टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग ने, उसे दुरुपयोग करने वालों के लिए आसान कर दिया है। आज के वक़्त में सारा संसार एक अजीबोगरीब बुचड़खाना है या कहो जीवित लैब है। और अपने आप में बहुत बड़ा जुर्म का अड्डा भी। जैसे, इस या उस पार्टी के कोढों के अनुसार बीमारियाँ, जन्म, अबोरशंस या लोगों की मृत्यु भी इन्हीं सब का हिस्सा हैं।