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Showing posts from 2024

बुझो तो जाने ?

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इन तस्वीरों को देखो  जानते हो इन्हें?  क्यों लगाई होंगी ये तस्वीरें मैंने यहाँ? कोई मेरी माँ को भी दिखाना और पूछना उनसे, की वो जानते हैं इन्हें?  मेरे हिसाब से तो वो कभी किन्हीं गुरुओं के चक्करों में पड़े नहीं।   ये हमारे आसपास के खास बच्चों के लिए भी हैं।  सोचो क्यों? बाकी पढ़ने वालों के लिए तो है ही।  

राजनीतिक रंगमंच और नशा-शिकार, मानव-रोबोट्स

आपकी हमारी जिंदगी का हर-पल, हर उतार-चढाव राजनीति और इस वयवस्था के इर्द गिर्द घुमता है और ज्यादातर हमारी जानकारी के बैगर।    जिंदगी के बहुत से अहम् फैसले ऐसा लगता है की हम खुद करते हैं। मगर ज्यादातर को जिस दिन समझ आने लगा की हकीकत इसके विपरित है तो हैरानी किसे नहीं होगी? खासकर, आम-आदमी के केस में। गाँव में आने के बाद, ये सब जैसे मैं हर रोज होते देख रही हूँ। अनुभव कर रही हूँ। इधर, उधर, उधर, जिधर देखो हर उस तरफ। कैसे संभव है ये? और मैंने इन लोगों को मानव-रोबोट्स का नाम देना शुरू कर दिया। ऐसा लग रहा था, जैसे इंसान जैसा कोई दिमाग है ही नहीं, इन लोगों के पास। जैसे कोई कंप्यूटर या रोबोट काम करता है, उसमें भरी हुयी प्रोग्रामिंग के अनुसार, कुछ-कुछ, वैसे ही सब यहाँ होता नजर आ रहा था।    मेरे लिए भी अजीब नहीं बल्की बहुत अजीब था ये सब देखना, अनुभव करना, जानना। धीरे-धीरे जब जानकार लोगों ने गुप्त-गुफाओं की तरफ इशारे करने शुरू किये तो जैसे अचानक से काफी कुछ समझ आने लगा। जैसे कंप्यूटर की सैटिंग कर दें की उसे कितनी देर बार अपने आप स्क्रीन ऑफ कर देना है या कब कितने मिन्ट्स के बाद...

Morality and Illigal Experimentations in Living Labs (Society)?

 Living Labs? ये क्या होती हैं? जहाँ कहीं जीवित प्राणियों पे, उस वक़्त चल रही किर्याओं या पर्किर्याओं पर अध्ययन होता है, उसे जीवित लैब बोलते हैं। जानवरों, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों तक पर, परिक्षण करने के कुछ रुल होते हैं। मगर, आज की टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग ने, उसे दुरुपयोग करने वालों के लिए आसान कर दिया है। आज के वक़्त में सारा संसार एक अजीबोगरीब बुचड़खाना है या कहो जीवित लैब है। और अपने आप में बहुत बड़ा जुर्म का अड्डा भी। जैसे, इस या उस पार्टी के कोढों के अनुसार बीमारियाँ, जन्म, अबोरशंस या लोगों की मृत्यु भी इन्हीं सब का हिस्सा हैं।        

राजनीती, आम आदमी को परेशानियाँ देती है, या उनके हल? (Tech Knowledge Abuse)

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पीछे जो AC, Cooler वाली पोस्ट लिखी थी, उसे फिर से पढ़ें। खासकर ये,  सुप्रीम कोर्ट पहुँचा पानी।   वैसे उत्तरी भारत का गर्मी का कहर और दक्षिणी भारत में बारिश के आसार। उत्तर भारत वालों को भी, दक्षिण की सैर पे निकल जाना चाहिए, Pleasant Weather के दर्शन के लिए। नहीं? खाली-पीली सी खबरें जैसे? कुछ-कुछ ऐसे? पता नहीं किस जोकर ज़ोन से कॉपी किया था, ये? पूरा क्रेडिट, ऐसे-ऐसे जोकर जोन को हँसाते रहने के लिए।    वैसे सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ पानी पहुँचता है? हाय-हाय गर्मी नहीं?        वैसे, ऐसे-ऐसे निर्जीव एप्लायंसेज (AC, Cooler) का, आदमियों या जीवों में किसी तरह की खराबी आने से कोई लेना-देना हो सकता है, क्या?  (आप सोचो, और बताओ। आते हैं, ऐसे-ऐसे कई तरह के निर्जीवों की खराबियों पर। और उनके आसपास के जीवों पर प्रभावों या दुस्प्रभावों पर भी।)  क्या सच में पानी सुप्रीम कोर्ट पहुँचा था? क्या सच में दिल्ली में बाढ़ आई थी? दिल्ली के कौन से हिस्से में? वहाँ इससे पहले बाढ़ कब आई थी? सुना, अरविन्द केजरीवाल का ऑफिसियल घर, सिविल लाइन्स पे और लाल किला भी इस बाढ़ की चपेट...

LG, AC, Softliner Cooler (Tech Knowledge Abuse, Dramas)

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16 . 05 . 2024  सुनील और सतीश मिलकर, बड़ी मेहनत के बाद LG, AC को VTRail (stebilizer) के साथ उतार कर ले गए हैं। ये stebilizer भी जाने क्यों, कहीं बदला गया है शायद? कृपया करके AC को AC ही समझें, ना की VC । और AC यहाँ, LG का है। कोई दिल्ली के LG की बात नहीं हो रही। हमारा सतीश (खाती) थोड़ा लापरवाह है, इसलिए AC उतारकर, खिड़की ठीक नहीं करके गया। कल करने की बोलकर, ऐसे ही छोड़ गया। अब इसके अंदर से बिल्ली घुसने की कोशिश करे या बन्दर, क्या फर्क पड़ता है? बताओ, बिल्ली कौन-सा CJI की रहती है यहाँ? और बन्दर कौन-सा Eurovision Song Contest विजेता? खिड़की खुली पड़ी है, तो पड़ी रहे। खंडहर की खिड़की ही तो है। ज्यादा से ज्यादा, धूप, लू और अंधड़ का कूड़ा ही तो घुस सकता है। उसके लिए अड़ा दो कुछ भी।         इस घटनाकर्म के तत्पश्चात, शिव अपने Softliner (cooler) की सेवा में पधार गए हैं। और Softliner black pump को उतार कर, Redish Boss को स्थापिथ कर गए हैं।  Softliner रात को नामतर मात्र चला है। शिव ने कल फिर अवतारित होने को बोला था। मगर आज शिव के अवतारित होने की उम्मीद धूमिल हुई। शिव, भोलू ...

दुबई में बाढ़? (Artificial Rain)

इससे पहले भी कभी सुना की दुबई में बाढ़ आई हो? मैंने तो नहीं। हो सकता है, मेरी जानकारी में ना हो। अभी जो दुबई बाढ़ का जिक्र हुआ, वो कौन-कौन से चैनल्स पे हुआ? अहम? उन्हीं चैनल्स पे क्यों हुआ? बाकी पे क्यों नहीं? जिन-जिन चैनल्स पे हुआ, वो किस-किस पार्टी के हैं? या किनके पक्ष में हैं? और भी ज्यादा अहम है, शायद? चलो मान लिया की सच में बाढ़ आई। तो ऐसा कैसे संभव है? क्या बाढ़, आँधी, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदायेँ, कृत्रिम रुप से लाई जा सकती हैं? अगर हाँ, तो कैसे? कहाँ-कहाँ, ऐसी विज्ञान और टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है? और कहाँ-कहाँ दुरुपयोग?      बच्चों की किताबों को थोड़ा अपडेट करने की जरुरत है। अगर वो अपडेट ना भी हों, तो भी कम से कम टीचर्स को तो ये काम अपनी जिम्मेदारी समझ करना चाहिए।  साथ में ये भी बताएँ की प्रकृति से ऐसा खिलवाड़, इंसान के लिए कितना फायदे या नुकसान का सौदा है? कुछ-कुछ वैसे ही, जैसे इस या उस पार्टी के कोढ़ के अनुसार, बिमारियों की भरमार। जैसे ना हुई बीमारियाँ बनाई जा रही हैं या कहो की घड़ी जा रही हैं। वैसे ही रेगिस्तान जैसे इलाकों में बाढ़ है।  टेक्नोलॉजी और ...