About Me

Curious at life, evolved with molecular and synthetic media. Author? Researcher? Academician? Writer? Science Communicator?

Tuesday, March 31, 2026

कितै भी थानेदार बिठा दें सैं

The way system talks through people? The language we talk at certain place is not ours? Even that belongs to that system? The way they represent it in certain system, can be entirely opposite in some other system. 


दादी के डंडे की आवाज़ आई। बाहर निकल कर देखा। 

हँसते हुए, दादी डूटी दे रे हो?

हाँ ऐ। कित की ड्यूटी।  कितै भी थानेदार बिठा दें सैं। बाहर पैर धरण के भी चोर होंगे। सोच सोच कै पाहं धरणे पड़ें सैं। 

थानेदार? हँसी ही नहीं रुक रही। 

और जीहतै डर डर कै बाहर पैर धरणा पड़े। किते भी धर दें सैं ये तो। 

लागय सै आपतैं किमैं बैर सै इनका? हँसी ही नहीं रुक रही। 

दादी भी हँस भी रहे हैं और दो पिल्लोँ के कहीं भी गोबर कर देने से दुखी भी। 

मेरे तै के, ये तो कितै भी धर आवें सै इस थानेदार नै। काल उनके बाहरणे धर राख्या था। भुण्डा काम सै इनका तै। 

आपके डंडे तै भी ना डरते। 

ना कित डरैं सै? डरैं तो करअ ना यो काम। 

Too much? Happy Fools Day  :)     

Monday, October 6, 2025

अजीबोगरीब प्राथमिकताएँ (Wrong Priorities)

जहाँ प्राथमिकताएँ ही गलत हों, क्या कहा जाए, वहाँ के बारे में?

अजीबोगरीब प्राथमिकताएँ  

आप खेलों में ना हों 

और वो कहें हम तो खिलवाएंगे?

आप क्लास, लैब में हों 

और वो कहें वहाँ किसने, 

कैसे-कैसे और कहाँ-कहाँ के कैमिकल्स 

कितने सालों पुराने, कहाँ-कहाँ से लाके रख दिए 

इससे हमें क्या लेना-देना?

क्लास में स्टूडेंट पढ़ने की बजाय नौटंकियाँ करें 

और इससे भी हमें क्या लेना? 

हम इन डायरेक्टर या VC की कुर्सियों पे 

ये सब देखने, सुनने या ठीक करने के लिए थोड़े ही बैठे हैं? 

हम तो खुद नौटंकियों का हिस्सा है 

पुरे संसार में यही चल रहा है 

बताओ हम क्या अलग हैं? 

हम तो भारत हैं 

Exams Fraud रचते हैं या रचने देते हैं 

इसीलिए इन कुर्सियों पे बैठे हैं? 

और यही भारत है? 

और यही सच इस भारत का?

कैसे-कैसे चौ दू पा जैसे जुओं के हवाले दुनियाँ? 

क्या इतना ही सच है इस दुनियाँ का?    


कैंपस में organized Violence तक की नौटंकियों करने के लिए बैठे हैं। 

कोरोना के नाम पर दुनियाँ को बंद करने के लिए बैठे हैं। 

आदमखोरों की तरह, 

कितने ही गुनाहों पे या तो पर्दे डाले बैठे हैं।

या खुद गुनाहों के खुदा हैं हम।

हैं ना कितनी अजीबोगरीब प्राथमिकताएँ? या कितनी महान प्राथमिकताएँ?    

आप ऐसे लोगों से और ऐसे संस्थान से दूर भागने लगते हैं। 9, 2, 11 जैसे। मगर, ऐसी-ऐसी और कैसी-कैसी प्राथमिकताओं वाले तो हर जगह बैठे हैं। क्यूँकि, ये आम आदमी नहीं हैं, जिनकी इतनी महान प्राथमिकताएँ हों। ये तो इस सिस्टम के कर्णधार हैं। अहम कड़ियाँ हैं, इस सिस्टम की। गाँव आकर, यहाँ के हालात देख जानकार आपको लगता है की शायद बहुतों की नहीं, तो कुछ की मदद तो कर ही सकते हैं। मगर इस सिस्टम के ये महान जादूगर नहीं चाहते, लोग अपने पैरों पे खड़े हों। इनके जालों से दूर, अजीबोगरीब बेड़ियों से दूर, अपने हिसाब से अपनी ज़िंदगियाँ जीयें। ऐसे में तो इन महान लोगों के हिसाब-किताब बिगड़ जाते हैं। आम गरीब आदमी को बस इतना-सा नहीं समझ आता की आपको इन महानों के जाल से निकलना है। उसी जाले में ज़िंदगी नहीं गुजारनी। ना आम आदमी को इतना आसानी से समझ आना और आ भी गया, तो ये महान कर्णधार ना उन्हें इतनी आसानी से निकलने देंगे, अपनी सिस्टमैटिक कैद से। जिस किसी ने इनके बेहूदा जालों से निकलने की कोशिश की, उसी का ईलाज कर देते हैं ये महान लोग। हैं ना कितने महान?

महानता, जैसे कल पार्लियामेंट में देखने को मिली? आपको क्या लगता है, संभव है? या महानता, जैसे 300, 400, 500, 5000 करोड़ तक लोगों के पास मिलते हैं या घरों में मिलते हैं? संभव है की कोई इतना पैसा किसी घर में इक्क्ठा कर ले और धरती के अंदर तक 24 घंटे तांक-झांक वाले इस सिस्टम को इतना कुछ होने के बाद खबर हो? और फिर उस कैश को seize करने के ड्रामे चलें? प्राथमिकताएँ? सिर्फ ड्रामे? 

एक तरफ आप किन्हीं के हालात जान, एक बहुत ही छोटी-सी रकम, किसी अपने को मदद के लिए देने को हाँ करते हैं। और जाने कहाँ-कहाँ हाय-तौबा मच जाती है। समझ से बाहर, ऐसे लोगों की प्राथमिकताएँ। ऐसे लोग उस घर को ही ताँडव का अड्डा बना डालते हैं। भला आम-आदमी की जान या ज़िंदगी की किम्मत ही कहाँ है, इस महानों के सिस्टम में। सबकुछ आकाओं के अनुसार होना चाहिए। नहीं तो अंजाम है, ईलाज है, इनके गुनाहों के खिलाफ उठती हर आवाज़ का। ऐसे ही जैसे एक बहुत ही छोटी-सी रक़म, किसी की नौकरी की 10-12 साल की जमा पूंजी, खाक खा रही है, इन महानों के जाले में। उससे भी महान, ऐसे लोगों का व्यवहार। कैसी-कैसी कुर्सियों पे बैठकर, कैसे-कैसे व्यवहार करते हैं लोग, अपने से छोटे एम्प्लाइज के साथ? वो संस्थाएँ, जिन्हें ऐसे पदाधिकारी मिल जाएँ, कैसे-कैसे कालिखों के साए में जीती होंगी? वैसे ही जैसे ऐसे समाज, जिन्हें इतने महान राजे-महाराजे मिल जाएँ? उसपे आम आदमी का वहम की वो चुनता है, अपनी सरकारें और उसके MPs और MLAs? इस गुप्त सिस्टम में क्या, कहाँ और कैसे चुना जाता है, ये तो अलग ही तरह का खेल है। जिसकी भनक तक ये आम आदमी को नहीं होने देना चाहते।  

Saturday, May 10, 2025

संदेशवाहक, गुप्तचर, गुप्तदूत? (Social Tales of Social Engineering)

Diversity of Messaging? 

ये पोस्ट तो? पिछले साल पढ़ी होगी आपने कहीं इसी या Social Tales of Social Engineering (40) में?

फिर आज कहाँ से आ गई?

कुछ चीज़ें एक बार में समझ नहीं आती? बार-बार पढ़ने पर या आसपास घटने पर, कहीं बेहतर समझ आती हैं? इसमें ऐसा क्या खास लगा मुझे?      

संदेशवाहक, गुप्तचर, भेदिया, विभिषण, गुप्तदूत? और भी कितने ही नाम हो सकते हैं ना? वो जो सब्ज़ी देने आते हैं। वो जो गुड़-शक्कर बेचने आते हैं। वो जो कटड़ा, भैंस बेच लो वाले आते हैं। वो जो बैडशीट बेचने आते हैं? वो जो शर्फ़ बेचने आते हैं? वो जो रद्दी लेने आते हैं। वो जो सूट बेचने आते हैं। वो जो झाड़ू, वाइपर बेचने आते हैं। वो जो चुन्नी बेचने आते हैं। वो जो शाल बेचने आते हैं। वो जो टीशर्ट, पायजामा बेचने आते हैं। 

उसपे वो जो मंदिर में सुबह-शाम भजन सुनाते हैं। या कोई खास मैसेज बताते हैं। वो जो ट्रैक्टर-ट्राली, गाड़ी, झोटा-बग्गी या कोई और व्हीकल्स आते हैं। वो जो पेड़-पौधे बेचने आते हैं। वो जो किसी के घर या दुकान के बनाने का सामान लेकर ईधर या उधर जा रहे होते हैं। वो जो साफ़-सफाई वाले आते हैं। या कब-कब आना बंद हो जाते हैं। वो जो फलाना-फलाना जाती से कुछ बुजुर्ग महिलाएँ, जो अब काम-धाम करने की हालत में नहीं हैं, सिर्फ़ खाना या कपड़े वगरैह के लिए कभी-कभार आते हैं। वो जो चप्पल-जूते बेचने वाले या ठीक करने वाले आते हैं। वो जो कुकर, गैस चूल्हा ठीक करने वाले आते हैं। 

वो जो, और भी कितनी ही तरह के पशु-पक्षी, कीट-पतंग, कीड़े-मकोड़े, सबके सब जैसे, संदेशवाहक कोई। आप जहाँ रहते हैं, उस सिस्टम की गवाही के गुप्तचर या कोढ़ कोई, ठीक आपके सामने होते हैं। कुछ ऐसा बता रहे होते हैं, जिनका अर्थ या अनर्थ उन्हें खुद नहीं पता होता। 

ये आपके आसपास के जीवन के बारे में और उनसे जुड़ी बिमारियों या रिश्तों की दरारों या कड़वाहटों, उनसे उपजे उत्पादों, कारकों के बारे में कितना कुछ बता रहे होते हैं? उनकी उत्पत्ति या प्रकिर्या के बारे में? और शायद उनके समाधानों के बारे में भी? कौन-सा जहाँ है ये? मुझे ये सब किसने और कैसे बताया? दुनियाँ के हर कोने में है, ये जहाँ। एक दुनियाँ के स्तर की बड़ी-सी लैब। जिसे जितने चाहो, उतने छोटे या बड़े स्तर पे अध्ययन के दायरे में रख सकते हैं। इससे भी मज़ेदार बात, ये लैब किसी भी विषय के लिए बंद नहीं है। जो चाहे, जिस विषय से चाहे या जिन विषयों की चाहे, मिश्रित खिचड़ी (Interdeciplinery) पका सकता है। और अध्ययन कर सकता है। आप आर्ट्स से हैं, तो आपको अपने लायक बहुत कुछ मिल जायेगा। विज्ञान से हैं, तो भी। और अर्थशास्त्र से हैं, तो भी। मर्जी आपकी, की कैसे और क्या जानना चाह रहे हैं।                          

OSLO UiO 

सोफ़े के कवर लो 

गद्दे के कवर लो 

मेज के कवर लो 

मुझे बालकनी में देख ठहर गई वो। मेरी तरफ देखा, सोफ़े के कवर ले लो। 

कहाँ से हो?

सुनारियाँ चौक से 

अरे आप कहाँ से आए हो? 

रोहतक, सुनारिया चौक 

अच्छा रहते हो वहाँ? 

हाँ! झोपड़ी है। 

वहाँ कहाँ से आए हो?

UP 

सोफे के कवर ले लो 

अरे, मैं तो मेहमान हूँ यहाँ। ऐसे ही पूछ रही थी। 

माँ आसपास होती तो सुनाती। पागल हो गई शुरू। किसी भी, कुछ भी बेचने वाले को रुकवाकर, पूछने लग जाती है। क्या मतलब हुआ, खामखाँ में? और फिर कोई भी कहानी घड़ देगी उसकी।   

जैसे हरी-भरी टोकरी और गई भैंस पानी में? या  "Don't Cross, Police Zone GAI Inspection"?

मतलब कुछ भी :)    

Saturday, July 6, 2024

Hierarchy और संबोधन ?

मैंने तो सुना है, ये सब कोड हैं। चाहे वो फिर नाम हो या पोस्ट? सुना है, आपमें से ही कहीं से शायद? और सर, मैडम, महोदया, मिस, श्रीमती, श्रीमान, आदरणीय, मीलॉर्ड जैसे संबोधन भी? जब कोड की दुनियाँ में ही बात करनी हैं तो अमेरिकनों की तरह ही करो। क्यों खामखाँ के पचड़े में पड़ना? वैसे ये जो विडियो प्रोमोप्ट आते हैं, या खास वक़्त पे खास वीडियो, ये कितने सच होते हैं, इसका पता कैसे चले? मुश्किल है ना थोड़ा? और अगर सोशल मीडिया के द्वारा बात करें, तो कौन-सा MP या MLA सीधा बात करते होंगे? उनके प्रोफाइल तो उनकी टीम चलाती होंगी। नहीं? तो MP, MLA लिखना बहुत नहीं होगा, उनके ऑफिसियल कोड बिगाड़े बिना? हाँ, सीधे शायद हम ऐसे बात नहीं करते, भारतीय हैं ना। पर मेरे जैसे तो नेताओं से मिलने के कोई खास शौकीन नहीं होते। जब अवसर हों तब भी। अपनी ही अलग दुनियाँ में रहते हैं।    

और कोड, कुछ-कुछ ऐसे ही जैसे, विजय कुमारी दांगी है तो चलेगा। सिर्फ विजय दांगी है, तो बैठो घर? अजीब हैं ये कुमार, कुमारी, राजे-महाराजों वाले साँग जैसे? या महज कोड शायद?     

वैसे Hierarchy को हिंदी में क्या कहते हैं?                         

Friday, July 5, 2024

It's Update Stupid?

राजनीतिक पार्टियाँ क्या कर रही हैं? उनके updates समाज में कैसे होते हैं?  

आप अपनी ज़िंदगी में वो नहीं कर सकते, जो आप चाहते हैं? आप चाहते हैं? ये प्रश्न ही गलत है शायद? ज्यादातर, आप वही चाहते हैं, या उसी से नफरत करते हैं, जो आपको ये पार्टियाँ या ये सिस्टम परोसता है?   

आपकी राजनीतिक पार्टियाँ या सिस्टम कहीं चोरी-छुपे आपको ये तो नहीं परोस रही?








या ऐसा कुछ बाँट रहा है? 




किसकी प्रॉपर्टी है ये ज़िंदगी?
आपकी या राजनीतिक पार्टियों या सिस्टम की?

इस पोस्ट में सब फोटो इंटरनेट से ली गई हैं। 

Tuesday, July 2, 2024

मीडिया की भूमिका : किसी भी समाज को आगे बढ़ाने में या पीछे धकेलने में?

Election Result Day And Drama Kidnapping Day? 

Live Streaming means live streaming all time, especially when you have a phone with you.

रिजल्ट वो भी भारत के इलेक्शन का? बदल जाता है, परिणाम वाले दिन भी? क्यूँकि सट्टा बाजार ही सत्ता है? Live Streaming चल रही थी और 400 से धड़ाम नीचे? वो भी कहाँ पर? कितने पर? 

तो ऐसा कैसे की, PGI के VC Office के बाहर से जब एक इंसान को उठाने के लिए इतनी फ़ोर्स को आना पड़ा? और वो जब फोन पे रिकॉर्डिंग कर रही हो, उन पुलिस वालों की (Officers?), जिन्होंने खुद मास्क नहीं लगा रखा था। तो कितने इन्हीं मीडिया वालों ने उसका जिक्र तक किया? वो रिकॉर्डिंग भी तो जहाँ भर में, बहुतों के पास होगी? कहाँ कैसे दब गई या दबा दी गई वो रिकॉर्डिंग? ठीक ऐसे? जैसे ये केस स्टडी वाली किताब, Kidnapped by Police? मीडिया में कहाँ-कहाँ भेजी गई थी, उसकी कॉपी? चलो ये तो एक खामखाँ-सा कोई आम इंसान था। और यहाँ आम इंसानों के साथ क्या कुछ तो नहीं होता? वैसे ही जैसे, कहीं पहले भी कहा, मीडिया की भूमिका अहम होती है। किसी भी समाज को आगे बढ़ाने में या पीछे धकेलने में। वैसे ही जैसे, pandemic जैसी राजनीतिक बीमारियों को छुपाने में? या उसके नाम का हौवा आम-आदमी को डराने में? दुनियाँ भर का मीडिया उस दौरान क्या कर रहा था? इतनी एकजुटता, आदमखोर राजनीती के खेल में?    

सबसे बड़ी बात तो ये की दुनियाँ भर का मीडिया क्या मुठ्ठी में है, ऐसे-ऐसे कारनामे रचने वाली पार्टियों के? या खुद एक हिस्सा भी है? मतलब इस सबका तो यही लगता है? प्रश्न जायज है ना? या ये भी गुनाह है? मोदी युग में तो शायद?     

या शायद कुछ ये भी कह सकते हैं, की बताने वालों ने तो फिर भी बताया है। चाहे कोढ़ के जरिए ही। जेल के बाथरुम तक कैमरों के हवाले होते हैं? अब किस हद तक, ये तो वही बेहतर बता सकते हैं, जो कहते हैं की ये दुनियाँ एक बुचड़खाना है।   

Monday, July 1, 2024

Morality and Illigal Experimentations in Living Labs (Society)?

 Living Labs?

ये क्या होती हैं?

जहाँ कहीं जीवित प्राणियों पे, उस वक़्त चल रही किर्याओं या पर्किर्याओं पर अध्ययन होता है, उसे जीवित लैब बोलते हैं। जानवरों, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों तक पर, परिक्षण करने के कुछ रुल होते हैं। मगर, आज की टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग ने, उसे दुरुपयोग करने वालों के लिए आसान कर दिया है। आज के वक़्त में सारा संसार एक अजीबोगरीब बुचड़खाना है या कहो जीवित लैब है। और अपने आप में बहुत बड़ा जुर्म का अड्डा भी। जैसे, इस या उस पार्टी के कोढों के अनुसार बीमारियाँ, जन्म, अबोरशंस या लोगों की मृत्यु भी इन्हीं सब का हिस्सा हैं।    

   

कहाँ-कहाँ है ये पार्लियामेंट?

Speaker और Microphone की कहानी 

और इसलिए इन्हें हम चुनते हैं, अपने MP या MLA?

कौन हैं ये लोग?

कैसे चुने जाते हैं?

जिसे पार्लियामेंट कहते हैं, वो असलियत में हैं क्या?

सबसे बड़ी बात, वहाँ बैठकर या वहाँ से बाहर आकर, हमारे MPs या MLAs करते क्या हैं?

किसके लिए काम करते हैं?    

ये प्रश्न किसी एक नेता के लिए नहीं, बल्की सब पार्टियों के लिए है।  
मान लो ये नेता लोग झूठ-मूठ के हैं। मान लो --

एक केस लेते हैं अभी स्पीकर वाला। माइक्रोफोन क्यों और किसने बंद कर दिया?

"बुआ ये कह रहा है, मक्रोफोन ऑन करो" 
वो copilot से कुछ प्रश्न सॉल्व करना चाह रही थी। नया-नया शौक पैदा हुआ है। 

हाँ। Settings में जाओ। Privacy Settings पे क्लिक करो। और माइक्रोफोन ऑन कर दो। 
पर ये तो ऑन ही नहीं हो रहा। 
दिखाओ। 
हम्म्म। कलाकारों ने कल्याण किया हुआ लगता है। पता नहीं कहाँ से की हुई हैं ये settings block और क्यों?
आप मुझे अपना लैपटॉप दो फिर। 
ना, मुझे भी काम करना है। तुम्हारा ही ठीक कर दूँगी। 
करो फिर। 
टाइम लगेगा। 
मुझे अभी चाहिए। 
उसमें टाइम लगता है। बुआ को कम्प्युटर इन गड़बड़ करने वाले कलाकारों जितना नहीं आता। विंडो ही फिर से install कर दूँगी। 
कितना टाइम लगेगा उसमें?
लगेगा। 
रात को करुँगी। 
अभी क्यों नहीं?
अभी बुआ काम कर रहे हैं। आप भी कोई और काम कर लो। ये मैं बाद में करवा दूँगी। 

ये Om Birla (Speaker, Parliament) कौन हैं?
और ये पार्लियामेंट?
Shashi Tharoor (MP) पे ही कटाक्ष क्यों हुआ?
और ये Deepender Hooda (MP) क्या कह रहे हैं?
ये MP ही हैं, ना?
हमारे MP, इन मार्शल पे भी थोड़ा प्रकाश डालेंगे? जो दूसरों के लैपटॉप्स, फोन्स वगैरह में घुसे पड़े हैं, उल्टे-पुल्टे काम करने के लिए। नाम तो बता दो कम से कम।  
 
कौन हैं ये मार्शल? क्या करते हैं?   
माइक्रोफोन on-off पार्लियामेंट में?
कहाँ-कहाँ है ये पार्लियामेंट? यहाँ भी, वहाँ भी, वहाँ भी। और जाने कहाँ-कहाँ?      

वैसे अच्छा काम है, जो समाज में चल रहा है, उसे बताना, दिखाना या समझाना। अगर बिना कोई जुर्म किए ऐसा संभव हो तो। क्यूँकि बहुत-सी पार्टियाँ तो ऐसे-ऐसे सामान्तर केस घड़ रही हैं, जो अपने आप में ही हो रहे जुर्म से कहीं बड़े जुर्म हैं। फिर चाहे वो रिश्तों की जबरदस्त तोड़फोड़ हो या बीमारियाँ या ऑपरेशन्स। या लोगों को दुनियाँ से ही उठा देना। और ऐसा हर रोज हो रहा है, सारे संसार में।      

Speaker और Microphone की कहानी में Copilot का क्या रोल है? ये इसी के लिए बंद किए गए हैं या और भी ऐसे-ऐसे AI (Artificial Intelligence) प्रोडक्ट्स के लिए?   

Friday, June 28, 2024

संविधान गपशप (Offensive Or Defensive Narratives)? 2

कभी सुना है, जीरो-कैलोरी डाइट? कोई खाना जीरो-कैलोरी भी हो सकता है?
जीरो फिगर?

क्या, ऐसे ही है फिलहाल मोदी 3.0? वायरस इंफेक्टेड जैसे? 

Vista ? दिल्ली ? या Microsoft?
या संविधान की कॉपी?
मगर कौन-सी पार्टी की? 
  
जैसे Co-in?
जैसे भारत से अमेरिका जाओ और ईमेल id हो जाए @yahoo. co . in?

या आजकल Microsoft का copilot जैसे?    

या जीरो Constitution? 
Any Business? 
Touch Screen जैसे? या AI (Articial Intelligence) जैसे?  

या जैसे, Her-O?   


गुब्बारा सुना है? कोई कहे, यार मुझे हैलियम बैलून चाहिएँ, फलाना-धमकाना के जन्मदिन के लिए?

Mummyfied? Fossilized? मिलता जुलता-सा जैसे? 
शायद digitization से मिलता हो?



ये पॉकेट मनी या पॉकेट डिक्शनरी तो सुना था। पॉकेट बुक? वो भी सविंधान? या कोई लखनवीं नवाब की किताब जैसे? बच्चों के रेफेरेंस के लिए होगी, शायद? 
 
सविंधान की किताब के रंग भी मस्त है। वैसे ही जैसे, हमारे यहाँ खाटू श्याम के झंडे के? जैसे, मोदी के सविंधान का कवर काला-सा? बाहर से। अंदर तो पता नहीं। राहुल गाँधी के संविधान की किताब का रंग, लाल या गुलाबी? या कांग्रेस और बीजेपी के सविंधान की किताबें? और अखिलेश के संविधान की किताब का रंग? कबूतरी?

कुछ-कुछ जैसे? Fishing? Pigion या Poultry या Gun or Pistol कल्चर या business?  
  
दाना डालो, कबूतर पालो? काँटा डालो, मछली जाल में? 
और? कट्टा, पिस्तौल या बन्दूक़ और पत्ता साफ कर डालो?  
    



ये सब फोटो गूगल से ली गई हैं 

और ये क्या बला है?

1 पे X

2 पे F ?


O constitution!?

या Trump Card जैसे?   

बच्चे MTech या PhD करते हैं, तो भी उनकी Thesis के रंग, रुप, नक्स, मोटाई, चौड़ाई, लम्बाई वैगरह, यूनिवर्सिटी द्वारा पहले से ही तय (predefined) होते हैं। 
सविंधान की किताब को पब्लिश करने के कोई रुल नहीं होते क्या? मैं भी अभी समझने की कोशिश कर रही हूँ। जानकार अपना ज्ञान परोसते रहें।    

Thursday, June 27, 2024

Ways to Topple The Government?

Minority can also topple the government, as per law? 


How?

Interesting Ways: Some points from this video itself.

Toppling a government with the help of a minority faction is indeed possible in certain circumstances, often involving complex political maneuvers and strategic use of constitutional provisions. Here’s how this can happen.

1. Internal Party Rebellion

2. Support Withdrawal by Coalition Partners

3. Governor’s Role

4. Judicial Intervention

5. Political Maneuvering and Alliances

Examples of Minority Factions Toppling Governments

Example 1 Karnataka 2019

Example 2 Madhya Pradesh 2020


How different people will read, watch or understand this whole process?
Depends?
What they know about these topics and how they think about them?
How I think about it? Maybe some next post.