Sunday, June 23, 2024

पौधों, जानवरों, और इंसानों में : समानताएँ और विभिन्ताएँ (Social Tales of Social Engineering)

समानताएँ और विभिन्ताएँ 

पौधों, जानवरों, और इंसानों में 

क्या-क्या हो सकती हैं? 

खाने-पीने में?

बच्चों की पैदाइश में? 

बीमारियों के कारणों, रोकथाम या इलाज में? 

या मरने की वजहों में?


 बहुत-कुछ?

आपको शायद पेड़-पौधों के बारे में काफी कुछ मालूम है? और आपको गाएँ, भैंसो के बारे में? और आपको शायद पेड़-पौधों और गाएँ भैंसों के बारे में? तो कैसे हो सकता है, की इंसानो के बारे में मालूम ना हो? 

यहाँ बच्चों के साथ शायद कुछ-कुछ ऐसा ही हो रहा है? बड़ों और बुजर्गों के साथ भी? और आप लगें हैं उन्हीं का कहा करने? मगर आपको शायद वैसे नहीं बताया गया, जैसे कोई भी आम-इंसान, ऐसे केसों के बारे में बताएगा। कैसे केसों के बारे में? बीमारियों के बारे में? या कहना चाहिए की ना हुई बिमारियों के बारे में। बहुत-सी समस्याओं के बारे में, जो असल में हैं ही नहीं या होनी ही नहीं थी। की गई हैं? कौन हैं ये लोग, जो ऐसा कर रहे हैं? और वो ऐसा क्यों कर रहे हैं?   

कहीं आप खुद भी तो उनमें से एक नहीं? जाने या ज्यादातर अन्जाने? और खुद ही शिकार भी? सोचो। आते हैं इन विषयों पे भी।                    

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