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Electric Meter Drama 31.8.2026

 मैं पास में ही  एक चाचा के घर गई हुई थी  क्यों? एक इंसान ने कुछ महीने से  शायद  शराब छोड़ी हुई थी  या कहो  वो पहले वाले हाल नहीं अब नहीं।  मगर  रक्षाबँधन वाले दिन के बाद  अचानक घर आना बँध  फ़ोन उठाना भी बँध  लो।  फिर पकड़ लिया लगता है?   ख़ास म ख़ास पार्टी वालों ने? चाची चाचा उधर जाते हैं  जहाँ वो रहता है  तो सोचा खबर ले लूँ।  वापस घर की तरफ आई  तो गली में भीड़ और शोर  काफ़ी तार भी पड़ी हैं गली में  एक से पूछा  भैया मीटर लगा रहे हो? हाँ।  मेरे यहाँ भी लगना है क्या? दीदी हमें तो पता नहीं  उधर हैं ना वो उनसे पूछ लो  भाई के घर की तरफ  ईशारा करके।  मैं उधर गई  बैठक में कई बैठे हुए हैं  मैंने एक से पूछा  भैया,  उधर घर का भी लगना है क्या? कोई जवाब नहीं।  दूसरे से पूछा  नहीं वहाँ का नहीं लगना।  क्यों? और लो जी  भड़ाम भड़ाम शुरु।  सारा लिखना शायद  काफी पड़ जाएगा  किसी पे? और क्यों?  या  क्या फ़र्क पड़ता है? इत...

यहाँ हर बात पर नाटक है Electric Meter Drama

बिजली विभाग के  कुछ कर्मचारी  कुछ बचे हुए घरों के  मीटरों को  बाहर खम्बों पर  लगाने आए?  काफ़ी महीने बाद?  कुछ महीने बाद?  अहम है क्या? पिछली बार  किस तारीख  महीने  और  साल को आए थे?   हाँ  तारीख़  महीना  और साल  सब अहम है।  सिर्फ़ यही नहीं  कौन कौन?  किस वाहन पर?  किस सामान के साथ?  वो सब भी अहम है।  किस किसके घर? किस किस नंबर के मीटर? किन किन के घर के  बाहर वाले खम्बोँ पर? कौन सी तरफ़ लगाए गए? ये इन सिर्फ़ कुछ घरों को  पिछली बार क्यों छोड़ गए?   ये सब अहम है?       क्यों?  पढ़ना लिखना सीखो  पढ़े लिखो और कढ़े लोगों की   राजनितिक चालों  और  खेलों को जानने के लिए।  अगली पोस्ट में कल वाला ड्रामा? 

औरतें यूँ ही नहीं पीटती यहाँ?

  औरतें  यूँ ही नहीं पीटती यहाँ  उन्हें गँवारपँठों द्वारा  So Called पढ़े लिखे  और कुर्सियों पर बैठे  So Called  Officers पिटवाते हैं? अहम  गँवारपँठों की जानकारी के बिना? Human Robotics    कितना सच?  कितना झूठ? ये समझदार  और  जानकारों के लिए छोड़ दिया।    यही युद्ध है  ईधर का भी? और  उधर का भी?  4 साल से आप  अपने घर बैठे हैं  मगर  आज तक वहाँ  पानी और बिजली नहीं  क्यों?  घर कहना भी गलत होगा  खँडहर  पड़दादा के वक़्त का।  So Called  बड़े लोगों की वजह से  जहाँ मीठा पानी  और  रहने लायक जगह हो  वहाँ  So called  CBSE Registered? स्कूल धोखाधड़ी से  और जबरदस्ती  अपनी दादागिरी  और गुंडागर्दी दिखाएँगे? या कहना चाहिए  दिखा रहे हैं।   आज तक उन  शिक्षा के धँधे के  गुंडों को  किसी बहन या बेटी ने  दी नहीं है वो जमीन  बल्की,  उनके ख़िलाफ़  शिकायत की हुई है।  क्या हुआ उस शिकाय...

यहाँ हर बात पर नाटक है (दिसंबर 2025 - 31.8.2026) Electric Meter Drama

  नाटक?  यहाँ हर बात पर नाटक है  बिजली का मीटर लगवाना हो?  या पानी का कनैक्शन लेना हो?  दिसंबर 2025  आप बिजली विभाग को  ईमेल करते हैं  मेरे यहाँ मीटर नहीं है  मीटर लगा दो।   कोई जवाब नहीं  दुबारा लिखते हैं  कोई जवाब नहीं।  उसके कुछ वक़्त बाद  एक दिन कोई  किसी  स्कूटरी पर आता है "ये राम सिंह का घर कहाँ है?"    जी यहाँ तो ऐसा कोई घर नहीं।  क्या काम था? उनके यहाँ मीटर लगाना है  ओह।  पड़दादा के यहाँ मीटर लगाना है?  किसके नाम से लगना है? राम सिंह के? नहीं,  पूछ रहा था मैं तो।  मैंने भी  एक रिक्वेस्ट दी हुई है  मीटर लगाने के लिए।     कहीं विजय दांगी के यहाँ  तो नहीं लगना?  नहीं  राम सिंह के यहाँ लगना है।  भाई, यहाँ तो  कोई राम सिंह नहीं रहता।  हाँ, अगर  किसी पड़दादा की बात है  तो वो तो हम बहुत छोटे थे  तभी जा चुके।  आपके यहॉँ की रिक्वेस्ट नहीं है  उन्हीं के नाम की है  आपके यही से।  अच...

सामान्तर केसों की घड़ाई (ताबीज़-कबीज?)

(ताबीज़-कबीज?)  FB के होम पेज पे एक विज्ञापन आया -- काला धागा पहने और पैसा ही पैसा पाएँ। पहली बात तो मैं ऐसे चक्रों में पड़ती नहीं। दूसरा, जहाँ कहीं ऐसी-ऐसी लॉटरी का जिक्र हो वो spam के इलावा किसी और जगह के लायक नहीं होते। Online Security में थोड़ा बहुत पढ़ा होगा।  ऐसा ही कुछ ताबीजों की कहानियाँ हैं शायद। जो दिखाई गयी शुभ हैं, मगर अशुभ हैं। अच्छा, पीछे किन-किन ने काले धागे बाँधे? और कहाँ-कहाँ? हाथ में? पैर में? गले में? या कहीं और? कितना वक़्त हो गया बाँधे हुए? किसने दिया या बताया वो सब बाँधने के लिए? और क्या बोलके बँधवाया गया? वैसा कुछ हुआ क्या? या उसके विपरीत? और फिर भी बाँधे हुए हैं? किसी शुभ कहके बँधवाने वाले के सिर मत होना। उन बेचारों या बेचारियों को भी उतना ही पता होगा, जितना आपको। सबसे बड़ी बात ये की ये पहली बार नहीं हो रहा। ऐसा आपके बड़ों के साथ हो चुका है। इसलिए कभी-कभी बड़ों के अनुभवों को जानना भी सही होता है। शायद भार नहीं होते वो आप पे, रक्षा कवच होते हैं।    किसी की कहीं कोई समस्या चल रही थी। नौबत, गाइड बदलने तक की आ गयी। समाधान भी पास ही मिल गया। ज्यादातर दोस्त...

बुझो तो जाने ?

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इन तस्वीरों को देखो  जानते हो इन्हें?  क्यों लगाई होंगी ये तस्वीरें मैंने यहाँ? कोई मेरी माँ को भी दिखाना और पूछना उनसे, की वो जानते हैं इन्हें?  मेरे हिसाब से तो वो कभी किन्हीं गुरुओं के चक्करों में पड़े नहीं।   ये हमारे आसपास के खास बच्चों के लिए भी हैं।  सोचो क्यों? बाकी पढ़ने वालों के लिए तो है ही।  

राजनीतिक रंगमंच और नशा-शिकार, मानव-रोबोट्स

आपकी हमारी जिंदगी का हर-पल, हर उतार-चढाव राजनीति और इस वयवस्था के इर्द गिर्द घुमता है और ज्यादातर हमारी जानकारी के बैगर।    जिंदगी के बहुत से अहम् फैसले ऐसा लगता है की हम खुद करते हैं। मगर ज्यादातर को जिस दिन समझ आने लगा की हकीकत इसके विपरित है तो हैरानी किसे नहीं होगी? खासकर, आम-आदमी के केस में। गाँव में आने के बाद, ये सब जैसे मैं हर रोज होते देख रही हूँ। अनुभव कर रही हूँ। इधर, उधर, उधर, जिधर देखो हर उस तरफ। कैसे संभव है ये? और मैंने इन लोगों को मानव-रोबोट्स का नाम देना शुरू कर दिया। ऐसा लग रहा था, जैसे इंसान जैसा कोई दिमाग है ही नहीं, इन लोगों के पास। जैसे कोई कंप्यूटर या रोबोट काम करता है, उसमें भरी हुयी प्रोग्रामिंग के अनुसार, कुछ-कुछ, वैसे ही सब यहाँ होता नजर आ रहा था।    मेरे लिए भी अजीब नहीं बल्की बहुत अजीब था ये सब देखना, अनुभव करना, जानना। धीरे-धीरे जब जानकार लोगों ने गुप्त-गुफाओं की तरफ इशारे करने शुरू किये तो जैसे अचानक से काफी कुछ समझ आने लगा। जैसे कंप्यूटर की सैटिंग कर दें की उसे कितनी देर बार अपने आप स्क्रीन ऑफ कर देना है या कब कितने मिन्ट्स के बाद...