Sunday, May 5, 2024

राजनीती, आम आदमी को परेशानियाँ देती है, या उनके हल? (Tech Knowledge Abuse)

पीछे जो AC, Cooler वाली पोस्ट लिखी थी, उसे फिर से पढ़ें। खासकर ये, सुप्रीम कोर्ट पहुँचा पानी। 

वैसे उत्तरी भारत का गर्मी का कहर और दक्षिणी भारत में बारिश के आसार। उत्तर भारत वालों को भी, दक्षिण की सैर पे निकल जाना चाहिए, Pleasant Weather के दर्शन के लिए। नहीं? खाली-पीली सी खबरें जैसे? कुछ-कुछ ऐसे?


पता नहीं किस जोकर ज़ोन से कॉपी किया था, ये?
पूरा क्रेडिट, ऐसे-ऐसे जोकर जोन को हँसाते रहने के लिए।
  
वैसे सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ पानी पहुँचता है? हाय-हाय गर्मी नहीं?     

वैसे, ऐसे-ऐसे निर्जीव एप्लायंसेज (AC, Cooler) का, आदमियों या जीवों में किसी तरह की खराबी आने से कोई लेना-देना हो सकता है, क्या? (आप सोचो, और बताओ। आते हैं, ऐसे-ऐसे कई तरह के निर्जीवों की खराबियों पर। और उनके आसपास के जीवों पर प्रभावों या दुस्प्रभावों पर भी।) 

क्या सच में पानी सुप्रीम कोर्ट पहुँचा था? क्या सच में दिल्ली में बाढ़ आई थी? दिल्ली के कौन से हिस्से में? वहाँ इससे पहले बाढ़ कब आई थी? सुना, अरविन्द केजरीवाल का ऑफिसियल घर, सिविल लाइन्स पे और लाल किला भी इस बाढ़ की चपेट में आ गया था? 


अपने आप आ गया था? या? हरियाणा या पंजाब के कुछ शरारती तत्वों की करामात की वजह से? कितने सारे लोगों ने भुगता उस परेशानी को? 


परेशानियाँ, जो असलियत में हैं ही नहीं। बल्की, राजनीती की पैदा की हुई? ठीक ऐसे, जैसे राजनीतिक बीमारियाँ?    

मतलब राजनीती, हमारी समस्याओँ के समाधान के लिए नहीं है? बल्की, ना हुई समस्याएँ लाने के लिए? 

LG, AC, Softliner Cooler (Tech Knowledge Abuse, Dramas)

16 . 05 . 2024 

सुनील और सतीश मिलकर, बड़ी मेहनत के बाद LG, AC को VTRail (stebilizer) के साथ उतार कर ले गए हैं। ये stebilizer भी जाने क्यों, कहीं बदला गया है शायद? कृपया करके AC को AC ही समझें, ना की VC । और AC यहाँ, LG का है। कोई दिल्ली के LG की बात नहीं हो रही। हमारा सतीश (खाती) थोड़ा लापरवाह है, इसलिए AC उतारकर, खिड़की ठीक नहीं करके गया। कल करने की बोलकर, ऐसे ही छोड़ गया। अब इसके अंदर से बिल्ली घुसने की कोशिश करे या बन्दर, क्या फर्क पड़ता है? बताओ, बिल्ली कौन-सा CJI की रहती है यहाँ? और बन्दर कौन-सा Eurovision Song Contest विजेता? खिड़की खुली पड़ी है, तो पड़ी रहे। खंडहर की खिड़की ही तो है। ज्यादा से ज्यादा, धूप, लू और अंधड़ का कूड़ा ही तो घुस सकता है। उसके लिए अड़ा दो कुछ भी।        

इस घटनाकर्म के तत्पश्चात, शिव अपने Softliner (cooler) की सेवा में पधार गए हैं। और Softliner black pump को उतार कर, Redish Boss को स्थापिथ कर गए हैं। 

Softliner रात को नामतर मात्र चला है। शिव ने कल फिर अवतारित होने को बोला था। मगर आज शिव के अवतारित होने की उम्मीद धूमिल हुई। शिव, भोलू की शादी की शॉपिंग में वयस्त होने की वजह से नहीं आ सका। कई तरह के एप्लायंसेज, और कई भोलूओं की शादी। पता नहीं भोलूओं की शादी से ही, क्या कनेक्शन है, इन सबका? और शिव का 16 से? ना उससे पहले और ना उसके बाद।  

19. 05. 2024   

शिव ने अपने रिप्लेसमेंट को भेझ दिया है। सतीश (बिजली वाला), अपने चिंटू के साथ पधारा है। खाती का अवतार, बिजली वाले में बदल गया है। मगर नाम के अलावा कुछ नहीं मिलता-जुलता। Softliner (Cooler) के चलने की उम्मीद अभी भी कायम है। और सतीश (बिजली वाला), अपने चिंटू के साथ, Softliner के fan की मोटर को उखाड़ कर ले गया। मोटर भी कूलर के रंग जैसी-सी ही, मैचिंग-मैचिंग जैसे, स्लेटी-सी। 

21. 05. 2024 

Softliner की  मैचिंग-मैचिंग स्लेटी-सी मोटर की जगह, काली मोटर लगा दी गई है। अब Softliner के चलने की पूरी-पूरी उम्मीद है। और Softliner कूलर आखिर चल पड़ा है। कहाँ जाने के लिए? ये तो पता नहीं। कहीं US का इरादा तो नहीं, वो भी नींद में? पता चले, ऊपर से गिर गया नीचे, धड़ाम।   

मीटर का मैन स्विच जो पहले लाइट के आने-जाने की खबर देता था, पीछे लाइट ठीक करने वाले ने बदल कर Neo का गन्दा-सा स्विच लगा दिया था। वैसे Neo सुना-सुना सा शब्द है, कहाँ सुना था? अब फिर से Anchor का लाइट वाला, मैन स्विच लग गया है। मगर लाइट के जाते ही या आते ही, इन्वर्टर को फिर से चलाना पड़ता है, इन्वर्टर वाली लाइट तभी चलती है। छोटे-मोटे लोग और छोटी-मोटी-सी समस्याएँ।  

LG, AC ले जाने वाला अभी तक परेशान है। ये महान AC एक बार खराब हुआ था। ठीक करने के लिए दिया, तो कभी-कभार ही ठंड करता है। हाँ, ज्यादातर वक़्त कमरे को गर्म बड़े अच्छे से कर देता है। बस, तब से ऐसे ही पड़ा था। बाकी बिजली के एप्लायंसेज के भी यही हाल रहे हैं। तो 6-7 एक्सटेंशन इक्क्ठी हो रखी हैं। ताकि एप्लायंसेज के जलने या खराब होने की बजाय, एक्सटेंशन के ही फ्यूज उड़ लें या जल लें। मगर वक़्त के साथ, वो भी सब खराब। जिनमें से दो ही, ठीक होकर आई हैं। बाकी, अभी भी खराब ही पड़ी हैं। ऐसे ही जैसे, वैक्यूम क्लीनर। 

वैसे उत्तरी भारत का गर्मी का कहर और दक्षिणी भारत में बारिश के आसार। उत्तर भारत वालों को भी, दक्षिण की सैर पे निकल जाना चाहिए, Pleasant Weather के दर्शन के लिए। नहीं? खाली-पीली सी खबरें जैसे? कुछ-कुछ ऐसे?


पता नहीं किस जोकर ज़ोन से कॉपी किया था, ये?
पूरा क्रेडिट, ऐसे-ऐसे जोकर जोन को हँसाते रहने के लिए।
  
वैसे सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ पानी पहुँचता है? हाय-हाय गर्मी नहीं?    
 

वैसे, ऐसे-ऐसे निर्जीव एप्लायंसेज (AC, Cooler) का, आदमियों या जीवों में किसी तरह की खराबी आने से कोई लेना-देना हो सकता है, क्या? आप सोचो। आते हैं, ऐसे-ऐसे कई तरह के निर्जीवों की खराबियों पर। और उनके आसपास के जीवों पर प्रभावों या दुस्प्रभावों पर भी।  

Monday, April 29, 2024

दुबई में बाढ़? (Artificial Rain)

इससे पहले भी कभी सुना की दुबई में बाढ़ आई हो? मैंने तो नहीं। हो सकता है, मेरी जानकारी में ना हो। अभी जो दुबई बाढ़ का जिक्र हुआ, वो कौन-कौन से चैनल्स पे हुआ? अहम?

उन्हीं चैनल्स पे क्यों हुआ? बाकी पे क्यों नहीं?

जिन-जिन चैनल्स पे हुआ, वो किस-किस पार्टी के हैं? या किनके पक्ष में हैं? और भी ज्यादा अहम है, शायद?

चलो मान लिया की सच में बाढ़ आई। तो ऐसा कैसे संभव है? क्या बाढ़, आँधी, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदायेँ, कृत्रिम रुप से लाई जा सकती हैं? अगर हाँ, तो कैसे? कहाँ-कहाँ, ऐसी विज्ञान और टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है? और कहाँ-कहाँ दुरुपयोग?     

बच्चों की किताबों को थोड़ा अपडेट करने की जरुरत है। अगर वो अपडेट ना भी हों, तो भी कम से कम टीचर्स को तो ये काम अपनी जिम्मेदारी समझ करना चाहिए। 

साथ में ये भी बताएँ की प्रकृति से ऐसा खिलवाड़, इंसान के लिए कितना फायदे या नुकसान का सौदा है?

कुछ-कुछ वैसे ही, जैसे इस या उस पार्टी के कोढ़ के अनुसार, बिमारियों की भरमार। जैसे ना हुई बीमारियाँ बनाई जा रही हैं या कहो की घड़ी जा रही हैं। वैसे ही रेगिस्तान जैसे इलाकों में बाढ़ है। 

टेक्नोलॉजी और पैसा इतना ही फालतु है, तो अमेरिका जैसे देश, एरिज़ोना जैसे राज्यों में कैक्टस की बजाय, कुछ अच्छा क्यों नहीं उगाते? भारत जैसा पिछड़ा देश, मुंबई जैसे शहरों में ऐसे एक्सपेरिमेंट की बजाय, राजस्थान जैसे इलाकों को क्यों नहीं हरा-भरा कर लेता? संभव तो शायद बहुत कुछ है मगर?

Sunday, September 3, 2023

बच्चों के अनोखे खेल

 बच्चों के अनोखे खेल सिर्फ बच्चे ही खेल सकते हैं। 

लक्ष्मणरेखा से यहाँ-वहाँ, बड़े-बड़े गोले बनाओ, चप्पल निकालो और दे पटापट। 

अर्रे, क्यों मार रहा है इन्हें? किसी ने काट लिया ना तो बहुत रोएगा। उठ यहाँ से। 

ये मुझे काटेँगे? अच्छा। और फिर से शुरू, उसी चप्पल से, दे पटापट। आसपास के इकट्ठे हुए मकोड़ों को एक गोल सर्कल में घेरकर मारना। 

लक्ष्मणरेखा, वही चौक, जो कीड़ी-मकोड़ों को भगाने के काम आता है। बच्चों के लिए खेल भी हो सकता है? बच्चे भी कैसे-कैसे खेल इज़ाद कर लेते हैं ना?


अब एक ये भी:

क्या कर रहे हो तुम इतनी देर से उस अलमारी में? क्या मिल गया ऐसा वहाँ?

चुप करो मिल गया, गुस्से में। सबकुछ इधर-उधर पड़ा है। ठीक कर रही हूँ। हर चीज़ अपनी जगह होनी चाहिए। ऐसी अलमारी में क्या मिलेगा? 

मेरी अम्मा, जो जहाँ है, वही रहने दे। नहीं तो मुझे फिर से सब सेट करना पड़ेगा। 

अर्रे, सब वहीँ का वहीँ है। हम तो सिर्फ खेल रहे थे। बस ये, यहाँ से यहां। ये वहां से वहां। ये इधर। ये उधर। और ये थोड़ा-सा इधर। आये बड़े, करना पड़ेगा फिर से सेट। और हाँ ये बाहर भी इतना कुछ फैला रखा है। चलो, ये तुम करो। इसमें भी टाइम लगेगा, दूसरे बच्चे को बोलते हुए। 

Wednesday, August 3, 2022

Wall Paper

पहली बार माँ के इस घर (जिसे मैं सूअरबाड़ा बोलती हूँ) में wall paper लगे थे,  थोड़े से हिस्से पे। और मुझे वो हद से ज्यादा भद्दे लग रहे थे। ऐसा क्या था उनमें? कौन लेकर आया था उन्हें? और कहाँ से? किसके द्वारा, कहाँ से मँगवाये गए थे? 

एक था स्लेटी रंग (Grey). उसपे पीछे से कुछ आ गया :) खून के धब्बे हैं या लाल ईंटें जिनका प्लास्टर उतर गया है? नंगी-पुंगी गुडियाएँ, जिनको हर तरह से निचोड़ा जा चुका, इधर के गुंड़ों द्वारा भी और उधर के गुंडों द्वारा भी। मतलब हर तरह से मरमत की हुयी है -- शायद कुछ-कुछ वैसे ही जैसे यहाँ दिख रहा है। Kinda लूट, कूट, पीट and Kick Out.        


सफ़ेद Wall Paper, उसपे 7-8 बार V जैसा-सा कुछ है, कहीं उल्टा, कहीं सीधा।  

    


यहाँ एक राजबीर अंकल की दुकान है। शायद उनके द्वारा मँगवाया गए हैं?
ये Automation है? Semiautomation या Enforced? 

माँ को कख्खा नहीं पता। बताने लगो तो सहन नहीं होता उनसे। उठके चल देती हैं। जिनसे लाये थे, शायद उन्हें भी कम ही पता है। माँ को समझ नहीं आता, की मैं हर चीज़ में ऐसी-ऐसी कहानियाँ कहाँ से घड लाती हूँ? अब उन्होंने शशि थरूर की सोशल मीडिया पे वाशिंगटन पोस्ट या न्यूयोर्क टाइम्स या इंडियंस newspapers वाली पोस्ट थोड़े ही पढ़ी हुयी हैं। वो जानती ही नहीं कौन शशि थरूर ?

वही पोस्ट्स जहाँ ये लिखा होता है की एक मिडिल क्लास फ़ैमिली 3-4 पीढ़ियों के बाद डुबने कैसे लगती है? या आप पड़ोस में कहीं किसी मोदी के यहाँ कोई Wall Paper देख फिर से कह रहे हो -- यहाँ भी? और उसी दिन शशि थरूर की वाल पे वो Wall Paper, Design ही मिलता है। या लंदन की किसी Street के बिल्डिंग का बाहर का डिज़ाइन कुछ-कुछ आपके इस So-Called हवेली वाले सूअरबाड़े के बाहर के डिज़ाइन से मिलता जुलता-सा दिखता है। 

अब माँ को कहाँ मालुम की दुनिया में ऐसे-ऐसे लिखने और पोस्ट करने वाले और कितनी तरह के राजनीतिज्ञ, मीडिया वाले, प्रोफेसर, डॉक्टर, साइंटिस्ट, आईएएस या आईपीएस हैं? और उन्हें कह दिया की मोदी, राहुल गाँधी, चौटाला आदि के सोशल साइट्स पे यही चल रहा है। तो शायद यही कहेंगी -- मेरा भेजा खराब मत कर, अपना तो किया हुआ है। पता नहीं कहाँ से क्या और कैसे-कैसे भिड़ा देती है। अब उन्हें क्या मालूम ये जोड़-तोड़-मरोड़ वाला प्रेजेंटेशन ज्ञान, कौन-कौन सी गुफाओँ (Crypts) की देन है और कौन-कौन सी टेक्नोलॉजी है उस सबके पीछे। हम जैसों को ही इतनी जद्दो-जहद और वक़्त के बाद भी उतना नहीं पता, जितना होना चाहिए शायद।  

Wednesday, June 1, 2022

Cryptic Women Trading?

 अगर आपको पता चले की कोई आपको धंधे में धकेलने की कोशिश कर रहा है या कर रहे हैं तो आप क्या करेंगे? उसपे पता चले की ये कुछ नया नहीं है, बल्की बहुत पुराना खेल है। 
उसपे पता चले की यहाँ तो defence, judiciary, government, opposition सब लगे पड़े हैं ?
कहाँ जायेंगे आप complain करने?
पिछले कई दिन से कोशिश कर रही हूँ ICICI का ये विडिओ अपलोड करने की    


Cryptic Trading Ways?

बैंक के employee काम करना तो दूर बात ही न करें?
सिर्फ इधर-उधर के धक्के।  

Friday, September 17, 2021

ज़हरीली चाय!

ज़हरीली चाय (Part of Bio-Chem-Physio-Psycho Warfares: Cons and Pros)

ऐसे बहुत से अनुभवों के बाद ही Bio-Chem-Physio-Psycho Warfares: Cons and Pros को लिखना शुरू किया। जब पता चला इन्सान ही नहीं, इस "केस गढ़ने वाली राजनीती के शिकार", (Parallel case creations to hype, to defuse, to twist or to manipulate) आस-पास के जीव-जन्तु भी हैं! 

This is just one experience. There are many such experiences especially in these last few years of watching, listening and then realizing, exactly what's happening... Poisoning of soil, water and air in so many forms. Food poising is just one of them.