Monday, October 19, 2026

सामाजिक सामान्तर घड़ाइयाँ होती कैसे हैं?

 सामाजिक सामान्तर घड़ाइयाँ होती कैसे हैं?

उनके लिए क्या कुछ चाहिए होता है?

किसी बुरी सामाजिक सामान्तर घड़ाई के 

दुष्प्रभाव से 

खुद को 

या अपने आसपास को कैसे बचा सकते हैं?   

संभव है क्या?

अगर हाँ, तो कैसे?   


ये जंतर मंतर तंत्र कोई जादू नहीं है

विज्ञान है 

एक तरीका है 

या कहो ढेरों तरह के तरीक़े हैं 

जिन्हें समझकर ना सिर्फ़ 

कहीं और हुई ऐसी किसी 

सामाजिक सामान्तर घड़ाई के 

दुस्प्र्भाव से बचा जा सकता है 

बल्की, 

विरोधों के बावज़ूद 

अपनी तय दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। 


Campus Crime Series में 

ऐसे से ही कुछ 

नुख्से 

या तरीक़े छुपे हैं। 

उनमें ना सिर्फ़ ये बताया हुआ है 

सामाजिक सामान्तर घड़ाईयाँ कैसे होती हैं 

जब सिस्टम को ये समझ आया 

वो उनके तरीक़े छाप चुकी है 

तो उन्होंने लिखने वाले को ही कैद कर दिया। 


जो अब तक पब्लिश नहीं हो पाया 

उसमें कहीं ज़्यादा बारीक़ी डिटेल हैं। 

और दुस्प्र्भावों से निपटने के तरीक़े भी। 


सबसे बड़ी बात 

वो किन्हीं पेपर्स या फाइल्स में नहीं है 

जिन्हे सिस्टम मिटा सके 

वो Live है 

जो चल रहा है 

आपकी ज़िंदगी में 

आपके आसपास के वातावरण में 

उनमें छुपे या 

छुपा दिए गए Ingredients में 

Media Culture Lab के जैसे। 

सिस्टम घड़ने वालों ने 

सारे सँसार को ही 

अपनी Media Culture Lab बनाया हुआ है। 

जंतर मन्त्र तंत्र? और सामाजिक सामान्तर घड़ाई तख़्ता पलट?

 तख़्ता पलट? 

क्या सच में ये इतना आसान है?

हाँ आपके अपने घर का तो है 

कैसे?

और अगर आपके अपने घर का संभव है 

तो सोचो 

और कहाँ कहाँ उसका असर होगा?

या कहाँ कहाँ और 

ऐसे से तख़्ता पलट की सम्भावना है?  


ये पहले भी होता रहा है 

और आगे भी होगा 

तरीक़े भी तक़रीबन एक जैसे से ही हैं?

या अलग अलग भी हो सकते हैं ?

एक तरीका 

जो 2010 में अपनाया गया?


 
 जहाँ आपके किसी एक कदम से 

तख़्ता पलट होता हो 

और आपको पता तक ना हो 

आप शिकार हैं 

और शिकारी कौन हैं?

कितना मुश्किल है 

आपको गोटी सा खेलना?


ये हर उस इंसान पर लागू होता है 

जिन्हें ये तक न मालूम हो 

वोट और इलेक्शंस क्या हैं?   

और Social Simulations क्या हैं?

कैसी Social Simulation के लिए 

कैसे कैसे Ingredients चाहिएँ?  

और कैसे Process होती हैं?


और परिणाम? 

कितने परसेंट करने वालोँ के अनुसार होंगे?  

आज के जहाँ में 

जहाँ इंसान को रोबॉट बनाया जा चुका है 

उसकी जानकारी के बिना। 

जंतर मन्त्र तंत्र? और सामाजिक सामान्तर घड़ाई ?

 जंतर मंतर? 

या जंतर मन्त्र तंत्र?

यहाँ स्क्रिप्ट लिखे जाते हैं?

सरकारों को हिलाने के?

नहीं 

शायद गिराने के?


इसलिए 

सरकारें डरती हैं?

यहाँ होने वाले किसी भी विरोध से? 

जंतर मंतर? 

जंतर मंतर नहीं है 

ये खास तरह का तंत्र है 

जहाँ तांत्रिक विधा मिलकर   

गुप्त तरीक़े से 

कोई सामाजिक सामान्तर घड़ाई घड़ती है 

और?

तख़्ता पलट कर देती है?


ये ताँत्रिक विधा क्या है?

वो जो आप सोचते हैं?

झाड़ फूँक?

टोने टोटके?

या पढ़े लिखे 

और कढों द्वारा 

ख़ास तरह की 

सामाजिक सामान्तर घड़ाईयाँ?     


ऐसी घड़ाईयाँ 

जिनका स्क्रिप्ट 

ख़ास जानकारों द्वारा लिखा जाता है 

वो ज्यादातर फाइल्स से चलता है 

और समाज के उस आख़िरी हिस्से तक 

उनकी ज़िंदगी के 

हर पहलू को छूता है 

कहीं ज़िंदगियाँ सवाँरता है 

और कहीं ज़िंदगियाँ बिगाड़ता है 


बुरे सिस्टम में 

कहीं बहुत ज़्यादा देता है 

और कही बहुत ज़्यादा छीन लेता है 

किसी भी अच्छे सिस्टम में 

सबके लिए कुछ न कुछ अच्छा होता है। 


जानते हैं आगे 

सामाजिक सामान्तर घड़ाईयोँ वाले इस जहाँ को। 

Sunday, October 18, 2026

Live Social Simulation, Delhi?

 मैंने एक Review Series शुरु की है 

उसी के तहत पिछले कई दिन से पहला Review? 

Plants Tales: Andhere Ujaale?

ऐसा क्या है इस छोटी सी Case Study main?

और इसका भला दिल्ली के चल रहे विरोध से क्या लेना देना?

राजनीती या सिस्टम ऐसे ऐसे Social Simulations कैसे चलाता है?  



Live Social Simulation, Delhi?

                             दिल्ली में कोई  ऐसी सी Live Social Simulations चल रही है क्या ?

धुन  की? 

DHUNKI? 


जानने की कोशिश करें? 


आखिर ये जामनगर में क्या खिचड़ी पक रही है? 

Live Social Simulations?

 ये दिल्ली में क्या हो रहा है?

क्या हो रहा है दिल्ली में?

दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा ने 

Live Show Organize कर दिया है?    


Show, Don't Tell?

We are in a matrix?

Matrix of Social Simulations?

Location?

Interactions?

And?


हम किस जगह पर हैं?

कैसे Infrastructure से घिरे हैं?

कैसे आसपास से घिरे हैं?

कैसे कैसे 

जीवों या निर्जीवों से?

हमारा सामना होता है?


बोलचाल, खाना पीना? 

हवा पानी? 

नया पुराना? 

साफ़ सुथरा?

या कचरा सा?  

या खँडहर सा? 

या कुरड़ी सा? 


एकदम से फिट? 

हटाकटा सा? 

या ऊबड़खाबड़? 

बेढंगा, फैला फैला? 

यहाँ वहाँ बिखरा बिखरा? 


या रखवाली से सँभाला? 

सँवारा हुआ?

किसी मुग़ल बाग़ सा? 

किसी घर के लॉन सा?   

या जँगल सा?